Showing posts with label DC Motor Theory. Show all posts
Showing posts with label DC Motor Theory. Show all posts

Aug 28, 2020

DC motor starter

Friday, August 28, 2020 3


    दिष्ट धारा मोटर स्टार्टर ( DC motor starter )

    जब कोई मोटर स्थिर अवस्था में होती है तो उसमें कोई Back EMF उत्पन्न नहीं होता है तथा आर्मेचर कम प्रतिरोध वाले परिपथ का कार्य करता है । 

    यदि मोटर को मुख्य सप्लाई के साथ सीधा ही जोड़ दिया जाए तो आर्मेचर चालक मुख्य सप्लाई से अधिक धारा ग्रहण करने लगते है जिसके निम्न परिणाम हो सकते है।  
    (i) Armature Winding का विद्युतरोधन नष्ट हो सकता है । 
    (ii) दिकपरिवर्तक (Commutator) पर अधिक स्फुलिंग या चिनगारियाँ ( sparking) उत्पन्न हो जायेंगी । 
    (iii) सप्लाई वोल्टता में गिरावट आ सकती है । 
    (iv) बहुत अधिक प्रारम्भिक बलघूर्ण (starting torque) उत्पन्न होगा, जिससे मोटर की गति अचानक बहुत अधिक बढ़ जायेगी तथा जिससे मोटर के घूमने वाले भागों को तथा मोटर पर लगे लोड को क्षति पहुँच सकती है ।

    Jun 14, 2020

    How to test armature winding

    Sunday, June 14, 2020 0

    वाइडिंग परीक्षण ( Testing the winding ) :- 



      आर्मेचर की वाइंडिंग करने के बाद उसके सिरे कम्यूटेटर के साथ जोड़ते है और इसके बाद एक परीक्षण करना आवश्यक हो जाता है । इस परीक्षण से वाइडिंग के दौरान होने वाले दोष ज्ञात किये जा सकते है । आमेचर वाइडिंग में होने वाले सामान्य दोष-
      1. भू सम्पर्कन ( earthed ) , 
      2. कुण्डलियों में लधुपथन ( short circuit ) , 
      3. कुण्डलियों में खुला दोष और क्वायल में खुला दोष और क्वायल के संयोजन उल्टे हो जाता है । 
      ये दोष विभिन्न परीक्षण विधियों से ज्ञात किया जा सकता है ।

      आर्मेचर वाइडिंग प्रतिरोध परीक्षण( Armature winding resistance test )-

      आर्मेचर क्वायल का प्रतिरोध low range के ओह्म मीटर द्वारा मापा जाता है और केल्विन सेतु को इस कार्य के लिए वरियता दी जाती है । सिम्पलैक्स लैप वाइडिंग ( तरंग व मल्टीप्लैक्स वाइन्डिंग के लिए कम्यूटेटर पिच Y की दूरी अनुसार ) की स्थिति में क्रमागत सैग्मेन्टों के बीच प्रतिरोध मापा जाता है । एक के बाद एक ( क्रमिक ) कम्यूटेटर खण्डों के बीच प्रतिरोध मापने की सरल व्यवस्था Fig में दिखाई गई है ।

      जैसा कि Fig में दिखाया गया है कि कॉटन टेप जिसके साथ  counterweight जुड़ा हुआ है इसे कम्यूटेटर के ऊपर से लटकाया जाता  है , इससे जुडी हुई लीड, कम्यूटेटर खण्डों पर पकड बनाये रखती है । इन संयोजन लीड को क्रमागत कम्यूटेटर खण्डों के साथ बारी बारी से जोड कर सभी क्वायल्स का प्रतिरोध मापा जाता है । सभी क्वायत्स का मापा गया प्रतिरोध समान होना चाहिए । यदि बहुत कम प्रतिरोध है तो यह टनों के बीच शार्ट सर्किट को दर्शाता है और यदि अधिक प्रतिरोध मापा गया है तो यह क्वायल्स में ओपन सर्किट को बतायेगा या क्वायल्से में अधिक टनों की संख्या को दर्शायेगा । 

      इन्सुलेशन प्रतिरोध परीक्षण ( Insulation resistance test ) :- 

      एक नंगे ताम्र तार से सभी कम्यूटेटर सेग्मेन्ट को शार्ट सर्किट करेंगे ।  Fig अब एक 250 वोल्ट तक की क्षमता वाले आर्मेचर को 500 वोल्ट वाले मैगर से, कम्यूटेटर सैग्मेन्टों व बॉडी के बीच इन्सुलेशन प्रतिरोध का परीक्षण करेंगे इस इंसुलेशन प्रतिरोध का मान 1 मेगा ओह्म से अधिक होना चाहिए । यदि मापा गया इन्सुलेशन प्रतिरोध 1 मेगाओम से कम हो तो वाइडिंग में नमी या कमजोर इन्सुलेशन होने का संदेह है । इस परीक्षण को कभी - कभी सिरिज प्रतिरोध लैम्प से भी किया जाता है और इसे 'भू सम्पर्क ' परीक्षण भी कहते है । यह परीक्षण केवल क्वायल के भू - सम्पर्कित होने पर ही संकेत  करता है और इन्सुलेशन प्रतिरोध को नहीं ।

      ग्राऊलर परीक्षण ( Growler test ) :- 

      आर्मेचर क्वायल में शार्ट सर्किट व क्वायल में ओपन सर्किट परीक्षण करने की सरल व सबसे सामान्य विधि ग्राउलर परीक्षण विधि है । 

      ग्राउलर ( Growler ) : -

      दो प्रकार के ग्राउलर होते है - 
      (1) आन्तरिक ग्राऊलर
      (2) बाहरी ग्राऊलर । 

      बाहरी ग्राऊलर का उपयोग छोटे आमचरों का परीक्षण करने के लिए किया जाता है और आन्तरिक ग्राऊलर का उपयोग बडे DC आर्मेचर और AC मोटर स्टेटर की वाइडिंग का परीक्षण करने के लिए किया जाता है ।

      बाहरी ग्राऊलर ( External growler ): 

      Fig में एक बाहरी ग्राऊलर दिखाया गया है जो कि एक इलैक्ट्रोमैग्नेटिक डिवाइस होती है जिसका उपयोग आर्मेचर में अर्थ फाल्ट, शार्ट सर्किट व क्वायल में ओपन सर्किट फाल्ट की पहचान करने व ये दोष कहां पर है , उस स्थान की पहचान करने के लिए किया जाता है ।
      इस ग्राऊलर में, एक लोह कोड के ऊपर एक क्वायल लिपटी होती है और यह 240 वोल्ट AC लाईन से जुड़ी होती है । सामान्यत कोड H आकार की होती है और इसकी ऊपरी भाग टेपर होता है जिससे इस पर आर्मेचर फिट हो सके Fig में इस ग्राऊलर को दिखाया गया है ।

      जब ग्राऊलर क्वायल को प्रत्यावर्ती धारा दी जाती है, तो इंडक्शन क्रिया द्वारा आर्मेचर कुण्डलियों में वोल्टेज उत्पन्न हो जाती है । 

      आन्तरिक ग्राऊलर ( Internal growler ) : 

      एक आन्तरिक ग्राऊलर जो प्रायः AC मोटरों के स्टेटर के लिए उपयोग होता है , यह आर्मेचरों के लिए भी उपयोग होता है । ये अतनिर्मित फिलर के साथ या फिलर रहित बनाये जाते है । अतनिर्मित फिलर ( built - in feelers ) ग्राऊलर के साथ एक flexible blade को जुडा होता है इसलिए अतिरिक्त हैक्सा ब्लेड की आवश्यकता नही पड़ती है । छोटे स्टेटरो में विशेषतया इस प्रकार के ग्राऊलर की आवश्यकता होती है जिनमें पृथक फिलर के लिए स्थान नही होता है । Fig  में एक पृथक फिलर युक्त आन्तरिक ग्राऊलर दिखाया गया है , जो बड़े आमचरों के लिए उपयोग होता है । 

      अर्थ फाल्ट वाइंडिंग के लिए ग्राऊलर परीक्षण ( Growler test for grounded coil ) : 

      जिस आर्मेचर का परीक्षण किया जाना है उसे ग्राऊलर पर रखा जाता है और तब सप्लाई का स्विच ' ऑन ' कर दिया जाता है जैसा कि Fig में दिखाया गया है, अब मीटर की एक लीड को कम्यूटेटर के सबसे ऊपर वाले खण्ड पर रखें , और मीटर की दूसरी लीड शॉफ्ट पर रखें । यदि मीटर पर पाठ्यांक दिखें , तो आर्मेचर को घुमा कर दूसरे कम्यूटेटर खण्ड को इस प्रकार ले आयें जिस प्रकार पहले था और पूर्व की तरह परीक्षण करें । जब मीटर कोई विक्षेप न दे, तो यह संकेत है कि इस कम्यूटेटर खण्ड से जुडी क्वायल भूसम्पर्कित ( grounded ) है । 

      लघु पथित क्वायल के लिए ग्राऊलर परीक्षण ( Growler test for shorted coil ) : 

      आर्मेचर में लघु परिपथ परीक्षण करने की विधि निम्न प्रकार की है । जिस आर्मेचर को टेस्ट किया जाना है उसे ग्राऊलर पर रख कर स्विच ऑन किया जाता है । अब एक पतला धातु का टुकडा , जैसा कि हेक्सा ब्लेड को आर्मेचर के सबसे ऊपरी स्लॉट पर रखा जाता है जैसा कि Fig  में दिखाया गया है । वाइडिंग में लघुपथन होने की स्थिति में ब्लेड तेजी से कम्पन्न करेगा एक आर्मेचर जिस पर क्रॉस संयोजन या इक्विलाईजर ( equalizers ) लगे हो उस पर हैक्सा ब्लेड वाला परीक्षण नहीं किया जा सकता है । इस प्रकार का आर्मेचर प्रत्येक स्लॉट पर कम्पन्न का कारण बनेगा , जिससे यह संकेत दिखाई देगा कि सभी वाइंडिंग लघु परिपथ है । 

      क्वायल में खुला परिपथ का परीक्षण ( Test for open circuit in coil ): 

      ग्राऊलर के साथ पैनल पर परिवर्तित प्रतिरोध के साथ मीटर ( मिली वोल्ट या अममीटर ) भी लगे होते है । इस स्थिति में आर्मेचर क्वायल मे खुला दोष को निम्न प्रकार ढुंढ सकते है । 

      दोष का एक क्वायल में खुला दोष के परीक्षण की ग्राऊलर विधि ( Growlertest for an open coil ) : 

      ग्राऊलर के साथ एक क्वायल में ओपन सर्किट का पता लगाने के लिए सामान्य तरीके से आर्मेचर को ग्राऊलर पर सैट कर दें । Fig  में दिखाये एक AC मिली - वोल्टमीटर से ऊपर वाले दो पास पास के छड़ों bars को टेस्ट करें । आर्मेचर को घुमायें और निकटतम छड़ों के बीच लगातार परीक्षण करते रहे । जब दो छडे खुली क्वायल के साथ जुडी हो और मिली - वोल्टमीटर इन दो छडों के साथ जुड़ा हो , तो मीटर को संकेतक pointer विक्षेप नहीं देगा । अन्य सभी छडे विक्षेप देगी । खुली क्वायल का यह टेस्ट मीटर के बिना भी किया जा सकता है , इसके लिए एक तार के टुकडे से ऊपर वाली दो छड़ों bars को लघुपथ किया जाता है । यदि तारों को शॉर्ट किया जाये और कोई स्पार्क पैदा न हो तो यह क्वायल में खुला दोष का संकेत है । यह खुलापन या तो कम्यूटेटर छडों में या स्वयं क्वायल में हो सकता है । यह विधि शार्ट सर्किट क्वायल के सिरों के बीच , लघुपथ की स्थिति कहाँ पर है , को ज्ञात करने के लिए भी किया जा सकता है । फिर भी हैक्सा ब्लेड परीक्षण लघुपथित क्वायल की खोज करने की सबसे संतोषजनक विधि है । 

      ड्राप परीक्षण ( Drop test ) : 

      आर्मेचर का सही प्रतिरोध , टनों की संख्या , लघुपथ और खुला पथ और क्वायल में उल्टे संयोजनों की जाँच करने की सबसे यथार्थ विधि ड्राप टेस्ट है । एक पोल पिच की दूरी पर कम्यूटेटर खण्डों के आर - पार में कम वोल्टेज की DC प्रदान करें । परिपथ केसिरिज में एक परिवर्ति प्रतिरोध जोड दें । DC प्रदाय का स्विच ऑन करें और Fig a और b के अनुसार निकटवर्ती कम्यूटेटर खण्डों से एक मिली वोल्टमीटर जोड दें । 

      परिवर्ती रिहोस्टेट ( variable rheostat ) के उपयोग से वोल्टमीटर की रिडिंग को विशिष्ट मान तक समायोजित करें । आमेचर को एक दिशा में घुमाते हुए , इसके अनुगामी कम्यूटेटर खण्ड से मिली - वोल्टमीटर के पाठ्यांक नोट करें । प्रत्येक बार पाठ्यांक लेते समय कम्यूटेटर खण्डों की स्थिति व संयोजन पहले वाले सैटअप की तरह ही होनी चाहिए । परिणाम के निष्कर्ष निम्न प्रकार से है । 
      1. यदि सभी पाठ्यांक समान है , तो वाइडिंग सही है । . 
      2. यदि मिली - वोल्टमीटर शून्य या निम्न वोल्टेज पढता है , तो कम्यूटेटर सेगमेन्ट से जुड़ी क्वायल में लघुपथ 
      3. यदि मिली - वोल्टमीटर उच्च वोल्टेज पढता है सैग्मेन्ट से जुडी क्वायल में खुलापन है । 
      4. यदि Fig b के अनुसार मिली - वोल्टमीटर उल्टी दिशा में विक्षेप करता है तो खण्डों से जुडी क्वायल उल्टी जुड गई है । 

      सामान्यतः आर्मेचर के नित्य प्रतिदिन किये जाने वाले परीक्षण इन्सुलेशन प्रतिरोध और लघुपथ केवल जब आर्मेचर वाइडिंग में दोष होने का सन्देह हो जाता है , तब ड्राप टेस्ट किया जाता है ।

      Apr 27, 2020

      DC Shunt Motor

      Monday, April 27, 2020 0
      डी.सी. शंट मोटर-
      इस मोटर की शंट वाईडिंग पतली तार और अधिक टर्नों की बनाई जाती है। शंट वाईडिंग पतली तार और अधिक टर्नों की होने के कारण इसका प्रतिरोध अधिक होता है।
      इस मोटर की शंट फील्ड वाईडिंग आर्मेचर और सप्लाई वोल्टता के समानान्तर में जुडी होती है। जिसके कारण इसके फील्ड का फलक्स स्थिर होता है और मोटर प्रत्येक भार पर एक जैसी गति पर चलती है। इसका स्टार्टिंग टार्क कुल टार्क का 1.5 गुणा से 2 गुणा तक होता है।

      Apr 22, 2020

      Types Of DC Motors In Hindi

      Wednesday, April 22, 2020 0
      डी.सी. मोटर के प्रकार-
      डी.सी. मोटर निम्न तीन प्रकार की होती है तथा इनका प्रकार उनके क्षेत्र वाईडिंग के कनैक्शन पर निर्भर करता है।
      1. Series motor
      2. Shunt Motor
      3. Compound Motor
      (A) Cumulative Compound Motor
              (I) Long Shunt
              (II) Short Shunt
      (B) Differential Compound Motor
              (I) Long Shunt
              (II) Short Shunt

      1. श्रेणी मोटर-
      इन मोटरों का श्रेणी क्षेत्र वाईडिंग मोटे लेमिनेटेड तार के कम टर्नों की बनी होती है। तथा इसे आर्मेचर के श्रेणी में जोडा जाता है जिससे पूर्ण भार धारा आर्मेचर और क्षेत्र वाईडिंग में से एक जैसी प्रवाहित होती है। श्रेणी क्षेत्र वाईडिंग मोटे तार की होने के कारण इसका प्रतिरोध कम होता है तथा कम प्रतिरोध के कारण इस वाइडिंग में वोल्टतापात कम होता है। इस मोटर की धारा भार पर निर्भर करती है। ये मोटरे कम भार पर कम धारा तथा अधिक भार पर अधिक धारा लेती है। श्रेणी मोटर की गति भी भार पर निर्भर करती है। कम भार पर ये मोटर अधिक तेज गति पर घूमती है और शून्य भार पर इनकी गति बहुत अधिक हो जाती है इसलिए इस प्रकार की मोटर को कभी भी बिना भार के नहीं चलाना चाहिए। ये मोटरे अधिक भार पर कम गति से घुमती है। इन मोटरों का प्रारम्भिक बलघूर्ण उच्च होता है।
      श्रेणी मोटर में लाईन धारा= IL=Ise=Ia
      आर्मेचर में वोल्टतापात = IaRa
      श्रेणी वाईडिंग में वोल्टता पात = Ise Rse = IaRse
      उत्पन्न होने वाला विरोधी विधुत वाहक बल = Eb =V-Ia(Ra+Rse)
                                 Ia=(V-Eb)/(Ra+Rse)
      मोटर आर्मेचर में उत्पन्न पावर= EbIa watts
      आर्मेचर में ताम्र हानि = Ia2Ra
      श्रेणी क्षेत्र ताम्र हानि = Ise2Rse = Ia2Rse
      मोटर की इनपुट पावर = V X IL=V X Ia       (Because IL=Ia)
      उत्पन्न शक्ति = Input Power – Losses in (armature winding+ field winding)
      = VIa-Ia2(Ra+Rse)

      उपयोग:- जहां उच्च प्रारम्भिक बलघूर्ण की आवश्यकता होती है वहां पर श्रेणी मोटर का प्रयोग मुख्यतः किया जाता है। इन मोटरो का प्रयोग मुख्यतः ट्राम, क्रेन, ट्रेन तथा इलेक्ट्रिक ट्रेक्शन, हॉयस्ट आदि में किया जाता है।

      Apr 21, 2020

      How to reverse a dc motor

      Tuesday, April 21, 2020 1
      DC Motor Direction of rotation- 
      जब मोटर को डी.सी. सप्लाई से जोडा जाता है तो आर्मेचर चालकों मे से विधुत धारा प्रवाहित होती है तथा प्रवाहित धारा की दिशा को चित्र मे दर्शाया गया है इस अवस्था में मोटर के घुर्णन की दिशा वार्मावर्त दिशा में होगी।
      dc shunt motor connection
      अब यदि डी.सी. मोटर के आर्मेचर में प्रवाहित विधुत धारा की दिशा पूर्व में प्रवाहित दिशा की विपरीत कर दिया जाये और क्षेत्र की ध्रुवता को पहले के समान ही रखा जाये तो मोटर के घूर्णन की दिशा बदल कर दक्षिणावर्त हो जायेगी। 
      ठीक इसी प्रकार से यदि क्षेत्र ध्रुवता को बदल दिया जाये लेकिन आर्मेचर धारा की दिशा को पूर्व की भांति रखा जाये तो भी मोटर के घूर्णन की दिशा बदल जायेगी अर्थात दक्षिणावर्त हो जायेगी।
      इसके अतिरिक्त यदि आर्मेचर चालको में विधुत धारा की दिशा तथा क्षेत्र ध्रुवता दोनों को एक साथ बदल दिया जाये तो मोटर के घुर्णन गति में कोई बदलाव नहीं आयेगा तथा मोटर वामावर्त दिशा में ही घुर्णन करेगी। .
      अर्थात यदि किसी डी.सी. मोटर के घुर्णन की दिशा को परिवर्तित करना हो तो आर्मेचर चालक में प्रवाहित विधुत धारा की दिशा अथवा क्षेत्र ध्रवों की दिशा दोनो मे से किसी एक का ही बदलना होगा। यदि दोनों को परिवर्तित कर दिया जाये तो मोटर के घूर्णन की दिशा में कोई परिवर्तन नहीं होगा और मोटर पूर्व की भांति ही गति करेगी। 

      Types Of DC Motor-
      DC Motor mainly three types these are-
      1.Series Motor
      2.Shunt Motor
      3.Compound Motor

      Apr 20, 2020

      Back EMF In DC Motor (English)

      Monday, April 20, 2020 0
      Back Electro Motive Force generated in a DC motor:
      When the motor is connected to the power supply, the armature of the motor starts rotating in the magnetic field due to the force, then the armature or conductor cuts the magnetic field lines of the main field, which causes the EMF induced in the motor armature conductor, these emf direction is just Opposite to applied source voltage, it is called back EMF due to its opposite direction to the applied voltage used. The voltage supplied to the motor must be high enough to eliminate the effect of the back EMF.

      Apr 18, 2020

      Construction Of DC Machine (English)

      Saturday, April 18, 2020 0
      In this post we will all study Construction Of DC Machine instead of Construction Of DC generator which will be same for both DC generator and DC motor, as both DC generator and DC motor have same structure. When these machines are manufactured the employees do not know whether it is a DC motor or a DC generator. Hence any DC generator can be used like a motor without any change in its structure and DC motor can be used as a DC generator.

      Apr 17, 2020

      Working Of DC Motor (English)

      Friday, April 17, 2020 0
      Introduction-    
      A DC motor is a machine which when provided with electrical energy, converts it into mechanical energy.
      DC motor can also be used in places where speed control is required. That is why DC motors are often used in trolleys, electric rails and production systems or elevators. This 1/100 H.P. Can be made in various sizes up to several thousand H.P.

      Working Principle-
      A current carrying conductor is placed in a magnetic field, then a mechanical force acts on it, which can be determined by Fleming's left hand rule. This force causes the driving force to move in the direction. This is the principle of motor work.

      Apr 16, 2020

      DC Motor Principal

      Thursday, April 16, 2020 0
      जब एक करंट प्रवाहित कंडक्टर को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है, तो यह एक Torque का अनुभव करता है और जिसके कारण यह घूमने की प्रवृत्ति रखता है। दूसरे शब्दों में जब एक चुंबकीय क्षेत्र और एक विद्युत क्षेत्र परस्पर क्रिया करते हैं, तो एक यांत्रिक शक्ति उत्पन्न होती है। डीसी मोटर या डायरेक्ट करंट मोटर इसी सिद्धांत पर कार्य करती है। इसे मोटरिंग क्रिया के रूप में जाना जाता है।
      DC Motor Working
      इस मोटर के घूमने की दिशा फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम द्वारा दी गई है, जिसमें कहा गया है कि यदि आपके बाएं हाथ की तर्जनी, मध्यमा और अंगूठे को परस्पर एक दूसरे परपेंडिकुलर फैलाया जाता है और यदि तर्जनी चुंबकीय फील्ड की दिशा को दर्शाती  है, मध्य उंगली धारा प्रवाह की दिशा को इंगित करती है तो अंगूठा उस घुमाव बल की दिशा को दर्शाता है जो  बल डीसी मोटर के शाफ्ट द्वारा अनुभव किया जाता है।