Oct 24, 2026

बिजली की मूल बातें, वायर, केबल और वायर जॉइंट | ITI Electrician Part 2

बिजली की मूल बातें, वायर, केबल और वायर जॉइंट – ITI Electrician 1st Year Notes in Hindi (Part 2)

ITI Electrician 1st Year Trade Theory की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए बिजली की मूल बातें, वायर और केबल की जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रिकल कार्य में वायर को सही तरीके से पहचानना, उसकी मोटाई मापना, उपयुक्त कंडक्टर चुनना और वायर जॉइंट बनाना जरूरी कौशल हैं।

इस लेख में हम ITI Electrician Trade Theory (Hindi), Wires, Joints, Soldering – U.G. Cables के प्रमुख विषयों को आसान हिंदी में समझेंगे।

इसमें बिजली की मूल बातें, कंडक्टर और इंसुलेटर, वायर का आकार मापने की विधि, वायर जॉइंट के प्रकार, सोल्डरिंग तथा अंडरग्राउंड केबल का परिचय शामिल है।

ITI Electrician Part 2 बिजली की मूल बातें वायर केबल और वायर जॉइंट


1. बिजली क्या है? (What Is Electricity in Hindi)

बिजली ऊर्जा का एक रूप है, जिसका उपयोग घरों, दुकानों, कार्यालयों, कारखानों और अनेक विद्युत उपकरणों को चलाने के लिए किया जाता है।

जब विद्युत आवेशों के प्रवाह से किसी चालक में विद्युत धारा उत्पन्न होती है, तो उसे Electric Current कहते हैं।

उदाहरण के लिए, जब किसी विद्युत परिपथ में बैटरी, तार और बल्ब को उचित तरीके से जोड़ा जाता है, तो परिपथ पूरा होने पर बल्ब जल सकता है।

बिजली से संबंधित कुछ प्रमुख शब्द हैं:

  • Electric Current (विद्युत धारा): विद्युत आवेश के प्रवाह की दर।

  • Voltage (वोल्टेज): विद्युत आवेश को प्रवाहित करने के लिए उपलब्ध विद्युत विभवांतर।

  • Resistance (प्रतिरोध): विद्युत धारा के प्रवाह का विरोध।

  • Electric Circuit (विद्युत परिपथ): विद्युत धारा के प्रवाह के लिए बना मार्ग।

  • Power (विद्युत शक्ति): विद्युत ऊर्जा के उपयोग या स्थानांतरण की दर।

विद्युत की प्रमुख इकाइयाँ

राशि                    इकाई                    प्रतीक
विद्युत धारा                    एम्पियर                        A
वोल्टेज                    वोल्ट                        V
प्रतिरोध                    ओम                        Ω
विद्युत शक्ति                    वाट                        W
विद्युत ऊर्जा                    जूल                        J
विद्युत आवेश                    कूलॉम                        C

इन इकाइयों को समझना ITI Electrician की आगे की पढ़ाई के लिए आवश्यक है।

2. कंडक्टर क्या है? (Conductor in Hindi)

कंडक्टर ऐसी सामग्री होती है, जिसमें से विद्युत धारा अपेक्षाकृत आसानी से प्रवाहित हो सकती है।

इलेक्ट्रिकल वायर के अंदर सामान्यतः ताँबे (Copper) या एल्युमिनियम (Aluminium) जैसे चालक पदार्थों का उपयोग किया जाता है।

कंडक्टर के उदाहरण:

  • ताँबा (Copper)

  • एल्युमिनियम (Aluminium)

  • चाँदी (Silver)

ताँबा अच्छी विद्युत चालकता और उपयोगी यांत्रिक गुणों के कारण विद्युत वायरिंग में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।

कंडक्टर का उपयोग

कंडक्टर का मुख्य काम विद्युत धारा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाना है। इसके सही आकार और सामग्री का चयन धारा, तापमान, इंस्टॉलेशन की स्थिति और लागू मानकों के अनुसार किया जाता है।

3. इंसुलेटर क्या है? (Insulator in Hindi)

इंसुलेटर ऐसी सामग्री होती है, जो सामान्य परिस्थितियों में विद्युत धारा के प्रवाह का बहुत अधिक विरोध करती है।

वायर के चालक हिस्से के ऊपर इंसुलेशन लगाया जाता है, ताकि चालक अनावश्यक रूप से दूसरे चालक या व्यक्ति के संपर्क में न आए।

इंसुलेटर के उदाहरण:

  • PVC

  • रबर

  • पोर्सिलेन

  • काँच

इंसुलेटर का क्या काम है?

इंसुलेशन विद्युत धारा के अनचाहे संपर्क, शॉर्ट सर्किट और बिजली के झटके के जोखिम को कम करने में मदद करता है। हालाँकि, कोई भी इंसुलेशन हर परिस्थिति में पूर्ण सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।

वायर का चुनाव करते समय उसके इंसुलेशन की स्थिति, तापमान सीमा और वोल्टेज रेटिंग का ध्यान रखना चाहिए।

4. कंडक्टर और इंसुलेटर में अंतर

कंडक्टर (Conductor)इंसुलेटर (Insulator)
विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित होने देता है।विद्युत धारा के प्रवाह का अधिक विरोध करता है।
ताँबा और एल्युमिनियम इसके उदाहरण हैं।PVC, रबर और पोर्सिलेन इसके उदाहरण हैं।
वायर के अंदर चालक के रूप में इस्तेमाल होता है।वायर के ऊपर सुरक्षा परत के रूप में इस्तेमाल हो सकता है।
इसका मुख्य काम विद्युत धारा पहुँचाना है।इसका मुख्य काम विद्युत अलगाव प्रदान करना है।

5. वायर क्या है? (What Is Electrical Wire)

वायर एक विद्युत चालक होता है, जो विद्युत धारा को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वायर में एक ठोस चालक या कई पतले तारों से बना चालक हो सकता है। इसके ऊपर आवश्यकता के अनुसार इंसुलेशन भी होता है।

वायर के सामान्य प्रकार

1. Solid Wire (सॉलिड वायर)

इसमें एक ही ठोस चालक होता है। इसका उपयोग निर्धारित वायरिंग और अन्य विद्युत कार्यों में किया जाता है।

2. Stranded Wire (स्ट्रैंडेड वायर)

इसमें कई पतले चालक तारों को मिलाकर एक चालक बनाया जाता है। यह सामान्यतः ठोस वायर की तुलना में अधिक लचीला होता है।

3. Insulated Wire (इंसुलेटेड वायर)

इस वायर के चालक के ऊपर PVC, रबर या अन्य उपयुक्त इंसुलेटिंग सामग्री की परत होती है।

4. Bare Conductor (नंगा चालक)

इस पर सामान्य इंसुलेशन नहीं होता। इसका उपयोग केवल उन अनुप्रयोगों में किया जाता है, जहाँ डिजाइन और सुरक्षा नियम इसकी अनुमति देते हैं।

6. केबल क्या है? (What Is Electrical Cable)

केबल एक या एक से अधिक विद्युत चालकों का संयोजन हो सकती है। इसमें आवश्यकता के अनुसार प्रत्येक चालक पर इंसुलेशन, बाहरी शीथ, आर्मर या अन्य सुरक्षा परतें हो सकती हैं।

केबल का निर्माण उसके उपयोग, वोल्टेज, वातावरण और यांत्रिक सुरक्षा की जरूरत के अनुसार किया जाता है।

केबल के सामान्य प्रकार

1. PVC Insulated Cable

इसमें PVC यानी Polyvinyl Chloride की इंसुलेटिंग परत होती है। इसका उपयोग अनेक प्रकार की विद्युत वायरिंग और इंस्टॉलेशन में किया जाता है।

2. Rubber Insulated Cable

इसमें रबर आधारित इंसुलेशन का उपयोग किया जाता है। इसका चुनाव केबल की निर्धारित रेटिंग और कार्यस्थल की परिस्थितियों के अनुसार किया जाता है।

3. Flexible Cable

इसमें चालक सामान्यतः कई पतले तारों से बना होता है, जिससे केबल अधिक लचीली होती है। इसका उपयोग उपयुक्त विद्युत उपकरणों और निर्धारित अनुप्रयोगों में किया जाता है।

4. Armoured Cable

इस केबल में अतिरिक्त यांत्रिक सुरक्षा के लिए आर्मरिंग दी जा सकती है। इसका उपयोग वहाँ किया जाता है, जहाँ केबल को यांत्रिक नुकसान से बचाने की जरूरत होती है।

5. Underground Cable

इस प्रकार की केबल को निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार जमीन के नीचे स्थापित किया जाता है।

ध्यान दें कि सभी केबल एक जैसी नहीं होतीं। केबल का चुनाव वोल्टेज रेटिंग, धारा क्षमता, इंसुलेशन, वातावरण और इंस्टॉलेशन की स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

7. वायर और केबल में क्या अंतर है?

वायर और केबल शब्द कई बार एक-दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल किए जाते हैं, लेकिन तकनीकी रूप से इनके निर्माण में अंतर हो सकता है।

वायर (Wire)केबल (Cable)
सामान्यतः एक चालक या चालक समूह को संदर्भित करता है।एक या अधिक चालकों का संयोजन हो सकता है।
ठोस या स्ट्रैंडेड हो सकता है।एक या अधिक इंसुलेटेड चालकों से बन सकती है।
इसके ऊपर इंसुलेशन हो भी सकता है और नहीं भी।इसमें डिजाइन के अनुसार इंसुलेशन और बाहरी शीथ जैसी परतें हो सकती हैं।
कुछ वायर सरल संरचना वाली होती हैं।केबल की संरचना उसके उपयोग के अनुसार अधिक जटिल हो सकती है।

महत्वपूर्ण: केवल मोटाई देखकर किसी वायर या केबल की क्षमता निर्धारित नहीं की जा सकती। सही चुनाव के लिए निर्माता की रेटिंग और लागू मानकों को देखना जरूरी है।

8. वायर का साइज कैसे मापा जाता है?

ITI Electrician के दूसरे मॉड्यूल में वायर की साइज मापने का विषय शामिल है। वायर के आकार का सही माप विद्युत कार्य में महत्वपूर्ण होता है।

वायर के आकार को मापने या पहचानने के लिए विभिन्न विधियाँ इस्तेमाल की जा सकती हैं।

8.1 SWG (Standard Wire Gauge)

SWG का पूरा नाम Standard Wire Gauge है। यह तार के व्यास को पहचानने के लिए इस्तेमाल होने वाली गेज प्रणाली है।

इस प्रणाली में गेज नंबर और तार के व्यास का संबंध उलटा होता है: सामान्यतः गेज नंबर बढ़ने पर तार का व्यास कम होता है।

वायर का सही आकार निर्धारित करने के लिए उपयुक्त SWG गेज का उपयोग किया जाता है।

8.2 Micrometer (माइक्रोमीटर)

माइक्रोमीटर एक मापक उपकरण है, जिससे बहुत छोटे व्यास को सटीकता से मापा जा सकता है।

वायर का व्यास मापने के लिए माइक्रोमीटर उपयोगी हो सकता है। माप लेते समय उपकरण को सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए और तार को इतना नहीं कसना चाहिए कि माप प्रभावित हो जाए।

SWG और माइक्रोमीटर में अंतर

  • SWG का उपयोग तार के व्यास को गेज नंबर से पहचानने के लिए किया जाता है।

  • माइक्रोमीटर का उपयोग व्यास को मापने के लिए किया जाता है।

  • दोनों विधियों का उद्देश्य तार के आकार की पहचान में सहायता करना है।

9. वायर जॉइंट क्या है? (Wire Joint in Hindi)

जब दो या अधिक विद्युत चालकों को विद्युत संपर्क बनाने के लिए जोड़ा जाता है, तो इस जोड़ को वायर जॉइंट कहते हैं।

वायर जॉइंट ऐसा होना चाहिए कि चालक के बीच उचित विद्युत संपर्क बना रहे और जोड़ यांत्रिक रूप से भी उपयुक्त हो।

कमजोर जोड़ से अधिक प्रतिरोध, गर्मी, वोल्टेज ड्रॉप या अन्य समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

ITI Electrician की किताब में कई प्रकार के वायर जॉइंट बनाने का व्यावहारिक प्रशिक्षण शामिल है।

10. वायर जॉइंट के प्रमुख प्रकार

10.1 Simple Twist Joint (सिंपल ट्विस्ट जॉइंट)

इस प्रकार के जोड़ में चालकों को निर्धारित तरीके से एक-दूसरे के चारों ओर घुमाकर जोड़ा जाता है।

इसका अध्ययन वायर जॉइंट के शुरुआती अभ्यास में किया जाता है। वास्तविक इंस्टॉलेशन में इसका उपयोग केवल तभी किया जाना चाहिए, जब संबंधित जोड़ उस कार्य के लिए स्वीकृत हो और उचित कनेक्टर या सुरक्षा व्यवस्था लागू हो।

10.2 Married Joint (मैरिड जॉइंट)

मैरिड जॉइंट एक प्रकार का वायर जॉइंट है, जिसे इलेक्ट्रिशियन के प्रशिक्षण में बनाया और पहचाना जाता है। इसे बनाने के लिए चालक सिरों को निर्धारित तरीके से तैयार करके आपस में जोड़ा जाता है।

इसका सही तरीका समझने के लिए किताब में दिए गए चित्र और प्रशिक्षक का प्रदर्शन देखना उपयोगी है।

10.3 Tee Joint (टी जॉइंट)

जब एक चालक को दूसरे मुख्य चालक से शाखा के रूप में जोड़ा जाता है, तो इस प्रकार के जोड़ को टी जॉइंट कहा जाता है।

इसे अंग्रेजी अक्षर T से समझ सकते हैं। इस जोड़ का उद्देश्य मुख्य चालक से एक शाखा कनेक्शन बनाना होता है।

10.4 Western Union Joint (वेस्टर्न यूनियन जॉइंट)

यह एक प्रकार का सीधा वायर जॉइंट है, जिसका अध्ययन इलेक्ट्रिकल प्रशिक्षण में किया जाता है। इसे उपयुक्त चालकों के सिरों को आपस में लपेटकर बनाया जाता है।

इसका अभ्यास करते समय चालक के आकार, सामग्री और जोड़ की मजबूती का ध्यान रखा जाता है।

10.5 Britannia Straight Joint (ब्रिटानिया स्ट्रेट जॉइंट)

ब्रिटानिया स्ट्रेट जॉइंट एक प्रकार का सीधा जोड़ है, जिसे उपयुक्त ठोस चालकों के लिए प्रशिक्षण में सिखाया जाता है।

इसमें चालकों को निर्धारित तरीके से जोड़कर यांत्रिक मजबूती प्राप्त करने का प्रयास किया जाता है।

10.6 Britannia Tee Joint (ब्रिटानिया टी जॉइंट)

यह टी जॉइंट का एक प्रकार है, जिसका अभ्यास इलेक्ट्रिशियन प्रशिक्षण में किया जाता है। इसमें एक चालक को मुख्य चालक से शाखा के रूप में जोड़ा जाता है।

10.7 Rat Tail Joint (रैट टेल जॉइंट)

रैट टेल जॉइंट एक ऐसा जोड़ है, जिसमें चालकों के सिरों को आपस में घुमाकर जोड़ा जाता है। इसका नाम जोड़ की बनावट से संबंधित है।

इसका अध्ययन वायर जॉइंट के विभिन्न प्रकारों की पहचान और व्यावहारिक प्रशिक्षण के अंतर्गत किया जाता है।

नोट: किताब में इन जोड़ो को बनाने का व्यावहारिक अभ्यास भी शामिल है। वास्तविक विद्युत इंस्टॉलेशन में केवल तारों को घुमाकर जोड़ना पर्याप्त नहीं है। उपयुक्त कनेक्टर, इंसुलेशन, यांत्रिक मजबूती और लागू विद्युत नियमों का पालन जरूरी है।

11. सोल्डरिंग क्या है? (Soldering in Hindi)

सोल्डरिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें सोल्डर नामक फिलर धातु की सहायता से दो धातु भागों के बीच विद्युत या यांत्रिक संपर्क बनाया जाता है।

इस प्रक्रिया में सोल्डर पिघलता है और जोड़ के हिस्सों के बीच प्रवाहित होकर ठंडा होने पर ठोस हो जाता है। सामान्य सोल्डरिंग में जोड़े जाने वाले मूल धातु भागों को स्वयं पिघलाना आवश्यक नहीं होता।

सोल्डरिंग के मुख्य भाग

  • Solder (सोल्डर): जोड़ बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाली फिलर धातु।

  • Soldering Iron (सोल्डरिंग आयरन): सोल्डर को गर्म करने वाला उपकरण।

  • Flux (फ्लक्स): जोड़ की सतह से ऑक्साइड हटाने या उनकी समस्या कम करने में मदद करने वाला पदार्थ।

  • Joint (जॉइंट): वह स्थान जहाँ धातु के हिस्सों को जोड़ा जाता है।

सोल्डर का प्रकार और फ्लक्स का चयन धातु, अनुप्रयोग तथा निर्माता के निर्देशों के अनुसार किया जाना चाहिए।

सोल्डरिंग करते समय सावधानियाँ

  1. उचित सुरक्षा उपकरण और हवादार कार्यस्थल का उपयोग करें।

  2. गर्म सोल्डरिंग आयरन को सावधानी से संभालें।

  3. गर्म हिस्सों को सीधे हाथ से न छुएँ।

  4. इलेक्ट्रिकल सर्किट की बिजली बंद करके ही संबंधित जोड़ पर काम करें।

  5. सोल्डरिंग पूरी होने पर जोड़ की जाँच करें।

  6. उपयोग किए गए सोल्डर और फ्लक्स के निर्देशों का पालन करें।

12. Crimping क्या है? (क्रिम्पिंग इन हिंदी)

क्रिम्पिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें उपयुक्त कनेक्टर या लग को विशेष क्रिम्पिंग टूल से दबाकर चालक के साथ मजबूत संपर्क बनाया जाता है।

इसका उपयोग कई प्रकार के इलेक्ट्रिकल टर्मिनेशन में किया जाता है।

क्रिम्पिंग करते समय कनेक्टर का आकार, वायर का साइज और क्रिम्पिंग टूल का मेल होना चाहिए। गलत क्रिम्पिंग से ढीला संपर्क, अधिक गर्मी या अन्य खराबी हो सकती है।

13. अंडरग्राउंड केबल क्या है?

अंडरग्राउंड केबल वह केबल है, जिसे निर्धारित सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुसार जमीन के नीचे स्थापित किया जाता है।

इसका उपयोग भूमिगत विद्युत वितरण और अन्य निर्धारित विद्युत प्रणालियों में किया जा सकता है।

अंडरग्राउंड केबल की प्रमुख विशेषताएँ

  • केबल की संरचना उसके उपयोग के अनुसार होती है।

  • इसमें चालक और इंसुलेशन जैसी आवश्यक परतें हो सकती हैं।

  • कुछ केबल में अतिरिक्त सुरक्षा के लिए आर्मरिंग भी दी जाती है।

  • केबल का चयन वोल्टेज, धारा क्षमता और इंस्टॉलेशन की स्थिति के अनुसार किया जाता है।

अंडरग्राउंड केबल के रखरखाव में क्या देखा जाता है?

केबल में खराबी की जाँच करते समय उसकी संरचना, इंसुलेशन और संबंधित कनेक्शन का निरीक्षण किया जाता है। इंसुलेशन रेजिस्टेंस मापने के लिए उपयुक्त परीक्षण उपकरण, जैसे मेगर, का उपयोग प्रशिक्षित व्यक्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कर सकता है।

अंडरग्राउंड केबल की जाँच और मरम्मत के लिए उचित प्रशिक्षण तथा सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।

14. ITI Electrician 1st Year के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न

प्रश्न 1: कंडक्टर क्या है?

उत्तर: ऐसी सामग्री जिसमें से विद्युत धारा अपेक्षाकृत आसानी से प्रवाहित होती है, कंडक्टर कहलाती है।

प्रश्न 2: इंसुलेटर क्या है?

उत्तर: ऐसी सामग्री जो सामान्य परिस्थितियों में विद्युत धारा के प्रवाह का बहुत अधिक विरोध करती है, इंसुलेटर कहलाती है।

प्रश्न 3: SWG का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: Standard Wire Gauge.

प्रश्न 4: माइक्रोमीटर का उपयोग किसलिए होता है?

उत्तर: बहुत छोटे व्यास जैसी मापों को सटीकता से मापने के लिए।

प्रश्न 5: वायर जॉइंट क्या है?

उत्तर: दो या अधिक विद्युत चालकों को विद्युत संपर्क बनाने के लिए जोड़ने की प्रक्रिया से बने जोड़ को वायर जॉइंट कहते हैं।

प्रश्न 6: टी जॉइंट का क्या उपयोग है?

उत्तर: मुख्य चालक से शाखा कनेक्शन बनाने के लिए।

प्रश्न 7: सोल्डरिंग क्या है?

उत्तर: सोल्डर नामक फिलर धातु की मदद से धातु भागों के बीच जोड़ बनाने की प्रक्रिया।

प्रश्न 8: क्रिम्पिंग क्या है?

उत्तर: विशेष टूल की मदद से कनेक्टर या लग को चालक पर दबाकर संपर्क बनाने की प्रक्रिया।

प्रश्न 9: अंडरग्राउंड केबल क्या है?

उत्तर: ऐसी केबल जिसे निर्धारित तकनीकी और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुसार जमीन के नीचे लगाया जाता है।

प्रश्न 10: वायर और केबल का चुनाव करते समय क्या देखना चाहिए?

उत्तर: चालक की सामग्री, आकार, इंसुलेशन, वोल्टेज रेटिंग, धारा क्षमता और इंस्टॉलेशन की स्थिति।

15. निष्कर्ष (Conclusion)

ITI Electrician 1st Year Trade Theory में बिजली की मूल बातें, कंडक्टर, इंसुलेटर, वायर, केबल और वायर जॉइंट का अध्ययन बहुत महत्वपूर्ण है। इन विषयों को समझने से विद्यार्थियों को आगे वायरिंग, विद्युत परिपथ और इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन की पढ़ाई में सहायता मिलती है।

वायर की साइज मापने के लिए SWG और माइक्रोमीटर का ज्ञान उपयोगी है। इसी तरह सिंपल ट्विस्ट, मैरिड, टी, वेस्टर्न यूनियन, ब्रिटानिया स्ट्रेट, ब्रिटानिया टी और रैट टेल जॉइंट की पहचान व्यावहारिक प्रशिक्षण का हिस्सा है।

सोल्डरिंग, क्रिम्पिंग और अंडरग्राउंड केबल की जाँच जैसे कार्य सही उपकरणों और सुरक्षा प्रक्रियाओं के अनुसार ही करने चाहिए।

अगला भाग: ओम का नियम, विद्युत परिपथ और प्रतिरोध को आसान हिंदी में समझें।

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